Varuthini Ekadashi 2026:- वरुथिनी एकादशी क्या है?
वरुथिनी एकादशी पापों से मुक्ति, मोक्ष की प्राप्ति और घर-परिवार में सुख-समृद्धि देने वाली मानी गई है। शास्त्रों में इसकी महिमा का विस्तार से वर्णन मिलता है, जिसमें बताया गया है कि जो व्यक्ति श्रद्धापूर्वक इस व्रत का पालन करता है, उसकी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
Varuthini Ekadashi 2026:- वरुथिनी एकादशी का धार्मिक महत्व
वरुथिनी एकादशी को उन व्रतों में गिना गया है जो व्यक्ति के पापों को दूर करते हैं और जीवन को शुद्ध करते हैं। पुराणों के अनुसार इस एकादशी का व्रत करने से जन्म-जन्मांतर के पाप भी समाप्त हो जाते हैं और आत्मा मोक्ष के पथ पर अग्रसर होती है। इस एकादशी का संबंध भगवान विष्णु के वामन रूप से है। भगवान का यह स्वरूप भक्तों की रक्षा करने वाला माना गया है। व्रती जब भक्ति-भाव से इस दिन पूजा करते हैं, तो उन्हें भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
जैसा नाम वैसा ही फल। “वरुथिनी” अर्थात रक्षा करने वाला। मान्यता है कि यह व्रत जीवन में होने वाली परेशानियों, अनिष्ट, बुरे प्रभावों और अशुभ ग्रहों से रक्षा करता है। परिवार में सुख-शांति आती है और बाधाएँ दूर होती हैं। स्त्रियों के लिए यह व्रत विशेष फलदायी माना गया है। यह व्रत सौभाग्य, दाम्पत्य सुख और स्थिरता प्रदान करता है। पुरुषों के लिए भी यह व्रत व्यापार-धंधे, नौकरी और धन वृद्धि का कारक माना गया है।
वरुथिनी एकादशी पर दान करने से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है। जरूरतमंदों की मदद करना, भोजन दान, अन्न-वस्त्र दान और गाय-सेवा विशेष शुभ मानी जाती है।
Varuthini Ekadashi 2026:- वरूथिनी एकादशी 2026 का शुभ मुहूर्त
वरूथिनी एकादशी सोमवार, अप्रैल 13, 2026 को
एकादशी तिथि प्रारम्भ – अप्रैल 13, 2026 को 01:16 ए एम बजे
एकादशी तिथि समाप्त – अप्रैल 14, 2026 को 01:08 ए एम बजे
14वाँ अप्रैल को, पारण (व्रत तोड़ने का) समय – 06:54 ए एम से 08:31 ए एम
पारण तिथि के दिन हरि वासर समाप्त होने का समय – 06:54 ए एम
Varuthini Ekadashi 2026:- वरूथिनी एकादशी के अनुष्ठान क्या हैं?
- वरूथिनी एकादशी पर, भक्त सुबह जल्दी उठते हैं और पवित्र स्नान करते हैं।
- भगवान विष्णु की पूजा और प्रार्थना करने के लिए तैयारी की जाती है।
- भगवान विष्णु की मूर्ति की पूजा धूप, चंदन के पेस्ट, फल, अगरबत्ती, और फूल से की जाती है ताकि देवता को पुकारा जा सके।
- भक्त भोजन करने से परहेज करते हैं। सौम्य रूप में, वे एक दिन में एक बार ही भोजन का सेवन कर सकते हैं जिसमें केवल सात्विक भोजन शामिल होता है।
- वरूथिनी एकादशी व्रत दशमी से आरंभ होता है, जहां भक्तों को भोर से पहले भोजन ग्रहण करना होता है।
- व्रत 24 घंटे की अवधि तक रहता है अर्थात् अगले एकादशी के दिन सूर्योदय तक।
- ब्राह्मण को भोजन, कपड़े और अन्य आवश्यक चीजें दान करने के बाद उपवास समाप्त होता है।
- भक्त पवित्र मंत्रों का जाप करते हैं और देवता के सम्मान में गीत गाते हैं।
- लोग भगवान विष्णु के दिव्य आशीर्वाद के लिए ‘विष्णु सहस्त्रनाम’ का भी पाठ करते हैं।
- भक्तों को अपना व्रत पूरा करने के लिए वरुथिनी एकादशी व्रत कथा को सुनना भी आवश्यक है।
Varuthini Ekadashi 2026:- वरुथिनी एकादशी व्रत कथा!
प्राचीन काल में नर्मदा नदी के तट पर मान्धाता नामक राजा राज्य करते थे। वह अत्यंत दानशील तथा तपस्वी थे। एक दिन जब वह जंगल में तपस्या कर रहे थे, तभी न जाने कहाँ से एक जंगली भालू आया और राजा का पैर चबाने लगा। राजा पूर्ववत अपनी तपस्या में लीन रहे। कुछ देर बाद पैर चबाते-चबाते भालू राजा को घसीटकर पास के जंगल में ले गया।
राजा बहुत घबराया, मगर तापस धर्म अनुकूल उसने क्रोध और हिंसा न करके भगवान विष्णु से प्रार्थना की, करुण भाव से भगवान विष्णु को पुकारा। उसकी पुकार सुनकर भगवान श्रीहरि विष्णु प्रकट हुए और उन्होंने चक्र से भालू को मार डाला।
राजा का पैर भालू पहले ही खा चुका था। इससे राजा बहुत ही शोकाकुल हुए। उन्हें दुःखी देखकर भगवान विष्णु बोले: हे वत्स! शोक मत करो। तुम मथुरा जाओ और वरूथिनी एकादशी का व्रत रखकर मेरी वराह अवतार मूर्ति की पूजा करो। उसके प्रभाव से पुन: सुदृढ़ अंगों वाले हो जाओगे। इस भालू ने तुम्हें जो काटा है, यह तुम्हारे पूर्व जन्म का अपराध था।
भगवान की आज्ञा मानकर राजा मान्धाता ने मथुरा जाकर श्रद्धापूर्वक वरूथिनी एकादशी का व्रत किया। इसके प्रभाव से राजा शीघ्र ही पुन: सुंदर और संपूर्ण अंगों वाला हो गया। इसी एकादशी के प्रभाव से राजा मान्धाता स्वर्ग गये थे।
जो भी व्यक्ति भय से पीड़ित है उसे वरूथिनी एकादशी का व्रत रखकर भगवान विष्णु का स्मरण करना चाहिए। इस व्रत को करने से समस्त पापों का नाश होकर मोक्ष मिलता है।
Varuthini Ekadashi 2026:- वरुथिनी एकादशी व्रत कथा!
- वरुथिनी एकादशी पर विष्णु जी को प्रसन्न करने के लिए देवी तुलसी की पूजा करें। साथ ही किसी गरीब को अन्न का दान करें।
- विष्णु जी को प्रसन्न करने के लिए वरुथिनी एकादशी पर वृषभ राशि के जातक गरीबों को चीनी का दान करें। साथ ही मां लक्ष्मी को उनकी प्रिय चीजों का भोग लगाएं।
- वरुथिनी एकादशी पर विष्णु जी, देवी तुलसी और मां लक्ष्मी की साथ में पूजा करें। साथ ही गरीबों को धन का दान करें। इससे आपके जीवन में चल रही कई समस्याएं दूर हो जाएंगी।
- वरुथिनी एकादशी पर प्रात: काल विष्णु जी की पूजा करें। साथ ही जरूरतमंदों को चावल का दान करें। इससे आपको मानसिक शांति मिलेगी।
- विष्णु जी को प्रसन्न करने के लिए वरुथिनी एकादशी पर उनकी पूजा करें। साथ ही देवी तुलसी की आराधना करें। इसके अलावा गरीबों को शहद का दान करना भी अच्छा रहेगा।
- यदि आपके जीवन में बार-बार परेशानियां आ रही हैं तो वरुथिनी एकादशी पर विष्णु जी और देवी लक्ष्मी की पूजा करें। साथ ही गरीबों को फल का दान करें।
- धन संबंधी परेशानियों से मुक्ति पाने के लिए वरुथिनी एकादशी पर मां लक्ष्मी और विष्णु जी की पूजा करें। इसी के साथ दूध का दान करना भी शुभ रहेगा।




