सनातन धर्म में एकादशी का व्रत अत्यंत पवित्र और पुण्य दायी माना जाता है। यह व्रत न केवल पापों का नाश करता है, बल्कि मोक्ष और मनोकामना पूर्ति का साधन भी है। कामदा एकादशी विशेष रूप से मनोकामनाओं की पूर्ति और पाप-प्रायश्चित्त के लिए जानी जाती है। यह व्रत करने से मनुष्य राक्षस, भूत-प्रेत जैसी योनियों से मुक्त होकर दिव्य लोक प्राप्त करता है।
प्रमुख कीवर्ड जो यहां यूज़ किया गया है इस ब्लॉग में कामदा एकादशी 2026, कामदा एकादशी व्रत, कामदा एकादशी पूजा विधि, कामदा एकादशी कथा, कामदा एकादशी महत्व, कामदा एकादशी तिथि, कामदा एकादशी मुहूर्त, भगवान विष्णु व्रत, हिंदू पर्व 2026, चैत्र शुक्ल एकादशी, व्रत एवं त्यौहार।
शास्त्रों में कहा गया है –
“एकादशी व्रतं पुण्यं सर्वपाप प्रणाशनम्।”
अर्थात एकादशी का व्रत सभी पापों का नाश करने वाला है।
Kamada Ekadashi 2026:- कामदा एकादशी 2026 का शुभ मुहूर्त
कामदा एकादशी रविवार, मार्च 29, 2026 को
एकादशी तिथि प्रारम्भ – मार्च 28, 2026 को 08:45 ए एम बजे
एकादशी तिथि समाप्त – मार्च 29, 2026 को 07:46 ए एम बजे
30 मार्च को, पारण (व्रत तोड़ने का) समय – 06:14 ए एम से 07:09 ए एम
पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय – 07:09 ए एम (30 मार्च)
Kamada Ekadashi 2026:- 2026 कामदा एकादशी कथा और कहानी
कामदा एकादशी की तुलना किसी अन्य साधारण एकादशी से नहीं की जा सकती। प्राचीन शास्त्रों के अनुसार इसका अत्यधिक महत्व है। आपके सभी शुभ कार्य स्वतः ही पूर्ण हो जाएंगे। स्वास्थ्य, करियर या पारिवारिक स्थिति चाहे कैसी भी हो, सफलता के मार्ग में कोई बाधा नहीं आएगी। विवाहित महिलाएं इस शुभ एकादशी का व्रत रखती हैं तो उन्हें जीवन भर अपने पति का साथ (अखंड सभावती) प्राप्त होगा। कामदा एकादशी का व्रत रखने से सभी भक्तों को सुख, मानसिक शांति और समृद्धि प्राप्त होती है। भगवान विष्णु अपने भक्तों को परम मोक्ष प्रदान करते हैं और उन्हें स्वर्ग में ऐसे स्थान दिलाते हैं जो देवताओं के लिए भी असंभव हैं। हिंदू पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कामदा एकादशी व्रत पूजा के पीछे एक रोचक कथा है।
महाभारत काल में भगवान कृष्ण ने पांडवों को कामदा एकादशी की यह कथा सुनाई थी। कथा इस प्रकार प्रारंभ होती है कि प्राचीन काल में पुंडरीक नामक एक नागराज थे। वे नागलोक के भोगीपुर नामक एक महान नगर के राजा थे, जो अत्यंत समृद्ध और खुशहाल हुआ करता था। वहाँ सोने के महल हुआ करते थे। राजा पुंडरीक को संगीत और नृत्य का बहुत शौक था, इसलिए उन्होंने अपने मनोरंजन के लिए कई अप्सराओं, गंधर्वों और किन्नरों को नियुक्त किया हुआ था। एक महान गंधर्व ललित थे, जिनकी गायन और नृत्य कला अद्वितीय थी। जब भी वे राजा के महल में प्रस्तुति देते, हर दर्शक उनके गीत और नृत्य से मंत्रमुग्ध हो जाता था। एक बार राजा ने अपने मित्र कर्कटक नाग को आमंत्रित किया। दोनों ललित के नृत्य को बड़े उत्साह से देख रहे थे। लेकिन अचानक नृत्य में एक छोटी सी गलती देखकर राजा क्रोधित हो गए।
ललित अपनी पत्नी ललिता से अगाध प्रेम करता था। नृत्य करते समय ललित अपनी प्रेमिका के प्रेम में इतना मग्न हो गया कि करकोटक को उसकी नृत्य-शैली में हुई इस गलती का पता चल गया। उसने राजा से इस नृत्य-शैली की शिकायत की। क्रोधित राजा पुंडरीक ने ललिता को राक्षस बनने का श्राप दे दिया। पुंडरीक के श्राप के कारण ललिता वन में भटकने लगा। जब उसकी पत्नी ललिता को उसके श्राप का पता चला तो वह बहुत दुखी और निराश हो गई। वह अपने पति की दयनीय स्थिति को लेकर चिंतित थी। वह उसकी मदद के लिए जंगल में उसका पीछा करने लगी। जंगल में भटकते हुए ललिता को अचानक एक महान ऋषि मिले और उसने उनसे अपने पति के श्राप से मुक्ति दिलाने की प्रार्थना की। ऋषि अत्यंत दयालु थे और उन्होंने ललिता पर दया दिखाई। उन्होंने ललिता को कामदा एकादशी के बारे में बताया। उन्होंने आगे कहा कि अपने पति के इस भयानक श्राप से मुक्ति पाने के लिए ललिता को कामदा एकादशी का व्रत करना चाहिए। ललिता ने महान ऋषि द्वारा बताए गए सभी नियमों का पालन करते हुए कामदा एकादशी का व्रत किया। भगवान विष्णु की कृपा से ललिता अपने पति के श्राप से पूरी तरह मुक्त हो गईं। कामदा एकादशी के व्रत-पूजा के कारण ललिता को उनकी युवावस्था और आकर्षण वापस मिल गया और उनका वैवाहिक जीवन सुधर गया। यह एकादशी चित्र शुक्ल पक्ष में मनाई जाती है। इस व्रत के दौरान भक्तों के सभी पाप धुल जाते हैं और उन्हें परलोक में भगवान विष्णु के साथ रहने का सौभाग्य प्राप्त होता है।
Kamada Ekadashi 2026:- कामदा एकादशी व्रत की पूजा विधि
- ब्रह्म मुहूर्त में उठें, और नित्यकर्म से निवृत होकर स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- अब अपनी श्रद्धा व सामर्थ्य के अनुसार फलाहार या निर्जला व्रत रखने के संकल्प लें।
- शुद्ध जल से आसन और पूजा स्थान की शुद्धि करें।
- भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर को गंगाजल से स्नान कराएँ और पीले वस्त्र अर्पित करें।
- अब उन्हें पीले पुष्प, तुलसी दल, कुमकुम, अक्षत, धूप और दीप अर्पित करें।
- नैवेद्य में पीला फल, मिष्ठान व तुलसी पत्र अर्पित करें।
- अब कामदा एकादशी की कथा पढ़ें/सुनें।
- यदि संभव हो तो श्रीविष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें, या फिर किसी भी विष्णु मंत्र का 108 बार जाप करें।
- इसके बाद भगवान विष्णु की आरती करें, और पूजा में। हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा प्रार्थना करें।
- अगले दिन द्वादशी के शुभ मुहूर्त में व्रत खोलें।
Kamada Ekadashi 2026:- कामदा एकादशी के अचूक उपाय
धन प्राप्ति का अचूक उपाय
कामदा एकादशी की रात विष्णु जी और मां लक्ष्मी की पूजा करें। पूजा के बाद एक लाल कपड़े में सुपारी, लघु नारियल और तुलसी की मंजरी को बांधें और उसे अपने घर की तिजोरी में चुपचाप रख दें। इस उपाय से जल्द ही आपको पैसों की कमी से छुटकारा मिल सकता है। साथ ही घरवालों को मां लक्ष्मी और विष्णु जी का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होगा।
गृह क्लेश से छुटकारा दिलाएगा ये उपाय
कामदा एकादशी की रात तुलसी के पेड़ के पास घी का दीपक जलाएं। मां तुलसी की पूजा करें और उनके मंत्रों का जाप करें। पूजा के समाप्त होने से पहले मां के सामने अपने सफल जीवन की प्रार्थना करें और अपनी गलतियों की माफी मांगे। इससे आपके जीवन में चल रही परेशानियां काफी कम होंगी और गृह क्लेश से भी छुटकारा मिल जाएगा।
मनोकामना पूर्ति का अचूक उपाय
एकादशी की रात भगवान विष्णु की पूजा करें। साथ ही उन्हें पीली खीर का भोग लगाएं। इससे आपके जीवन में चल रही समस्याएं कम होंगी और जल्द हर मनोकामना पूरी हो सकती है। इसके अलावा आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा।




