Sita Navami 2026:- सीता नवमी 2026 कब है, जानें कैसे हुआ था मां सीता का जन्म शुभ मुहूर्त, पूजन विधि, महत्व और अचुक उपाय!!

Sita Navami 2026

Sita Navami 2026:- जब भी रामायण की बात होती है, ज्यादातर लोगों की नजर भगवान राम, लक्ष्मण और हनुमान जैसे वीरों पर जाती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस महान कथा के केंद्र में एक ऐसी शक्ति भी रही, जो न तो हथियार लेकर लड़ी और न ही जोर से कुछ कहा फिर भी पूरी कहानी की दिशा बदल दी? वो शक्ति थीं माता सीता. सीता नवमी यानी माता सीता का जन्मदिन, एक ऐसा दिन है जो हमें बताता है कि सच्ची ताकत कभी-कभी शांति, सहनशीलता और आत्मबल में भी होती है. ये दिन हर साल वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है. इस साल यह पर्व 7 मई 2025 को पड़ेगा. जैसे राम नवमी पर भगवान राम के जन्म का उत्सव होता है, वैसे ही सीता नवमी पर माता सीता के जीवन और मूल्यों का सम्मान किया जाता है.

Sita Navami 2026:- कौन थीं माता सीता?

मिथिला के राजा जनक ने जब हल से धरती जोती, तो भूमि से एक दिव्य कन्या प्राप्त हुई, वही थीं भूता की बेटी “भूमिजा”, जनक नंदिनी “जानकी”, जिन्हें हम आज माता सीता के नाम से जानते हैं. कहा जाता है कि वह देवी लक्ष्मी का अवतार थीं और भगवान राम की पत्नी बनीं. वह केवल एक रानी नहीं, बल्कि धैर्य, पवित्रता और धर्म का जीता-जागता स्वरूप थीं.

Sita Navmi 2026:- सीता नवमी 2026 का शुभ मुहूर्त

सीता नवमी शनिवार, अप्रैल 25, 2026 को

सीता नवमी मध्याह्न मुहूर्त – 11:01 ए एम से 01:38 पी एम

अवधि – 02 घण्टे 37 मिनट्स

सीता नवमी मध्याह्न का क्षण – 12:19 पी एम

नवमी तिथि प्रारम्भ – अप्रैल 24, 2026 को 07:21 पी एम बजे

नवमी तिथि समाप्त – अप्रैल 25, 2026 को 06:27 पी एम बजे

Sita Navmi 2026:- सीता नवमी की पूजन विधि

  • सीता नवमी पर ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
  • स्नान के बाद साफ वस्त्रों को धारण करें।
  • फिर भगवान श्री राम और सीता माता की मूर्ति को स्नान कराएं
  • इसके बाद राम जी और सीता माता की विधिपूर्वक पूजा करें।
  • पूजा के बाद भोग लगाएं।
  • सीता माता के समक्ष दीप प्रज्वलित करें।
  • बाद में परिवार के साथ मिलकर राम जी और माता सीता की आरती करें।
  • इस दौरान रामायण का पाठ बेहद शुभ माना जाता है। इसलिए इसका पाठ करें।

Sita Navmi 2026:- सीता नवमी का महत्व

सीता नवमी का दिन राम नवमी की तरह ही शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन जो राम-सीता का विधि विधान से पूजन करता है, उसे 16 महान दानों का फल, पृथ्वी दान का फल तथा समस्त तीर्थों के दर्शन का फल मिल जाता है। वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि पाने के लिए सीता नवमी का श्रेष्ठ माना गया है। सीता नवमी के दिन माता सीता को श्रृंगार की सभी सामग्री अर्पित की जाती हैं। साथ ही इस दिन सुहागिनें व्रत रखकर अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं।

Sita Navmi 2026:- माता सीता के जन्म की कथा

वाल्मिकी रामायण के अनुसार एक बार मिथिला में भयंकर सूखा पड़ा था जिस वजह से राजा जनक बेहद परेशान हो गए थे।  इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए उन्हें एक ऋषि ने यज्ञ करने और  खुद धरती पर हल चलाने का सुझाव दिया। राजा जनक ने अपनी प्रजा के लिए यज्ञ करवाया और फिर धरती पर हल चलाने लगे। तभी उनका हल धरती के अंदर किसी वस्तु से टकराया। मिट्टी हटाने पर उन्हें वहां सोने की डलिया में मिट्टी में लिपटी एक सुंदर कन्या मिली। जैसे ही राजा जनक सीता जी को अपने हाथ से उठाया, वैसे ही तेज बारिश शुरू हो गई। राजा जनक ने उस कन्या का नाम सीता रखा और उसे अपनी पुत्री के रूप में स्वीकार किया।

Sita Navmi 2026:- सीता नवमी के दिन करें ये खास उपाय

जानकी स्तोत्र का करें पाठ

सीता नवमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और फिर, साफ वस्त्र धारण करें। अब एक आसन पर बैठकर शांत मन से श्रद्धा पूर्वक जानकी स्तोत्र का पाठ करें। सीता नवमी के दिन जानकी स्तोत्र का पाठ करना बहुत फलदायी माना जाता है। ऐसा करने से जातक को माता सीता की कृपा प्राप्त होती है और जीवन के दुखों से निजात मिल सकती है। इसके अलावा, अगर सीता नवमी के दिन विधि-विधान से पूजा करते हैं और श्रद्धा पूर्वक जानकी स्तोत्र का पाठ करते हैं, तो इससे जीवन के सभी कष्टों से निजात मिल सकती है। साथ ही, इससे व्यक्ति की मनोकामनाएं भी पूर्ण हो सकती हैं।

पीले वस्त्र करें धारण

सीता नवमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद पीले रंग के वस्त्र धारण करना बहुत शुभ माना जाता है। साथ ही, इस दिन माता सीता और श्रीराम को भी पीले रंग के वस्त्र अर्पित करने चाहिए और उन्हें पीले फूल भी चढ़ाएं। ऐसा करने से घर में कभी भी धन की कमी नहीं होती है और आर्थिक स्थिति में भी सुधार आने लगता है। अगर आप इस उपाय को सीता नवमी के दिन करते हैं, तो इससे घर में सदैव सकारात्मकता बनी रहती है।

माता सीता और श्रीराम की पूजा करते समय करें यह उपाय

अपने वैवाहिक जीवन को खुशहाल बनाने के लिए सीता नवमी के दिन माता सीता और श्रीराम जी की एक साथ पूजा करें। इस दौरान माता जानकी के माथे पर सात बार सिंदूर अर्पित करें और फिर, अपने माथे पर भी उस सिंदूर को लगाएं। इस उपाय को सीता नवमी के दिन करने से वैवाहिक जीवन में आ रही समस्याओं से राहत मिल सकती है। साथ ही, जीवनसाथी के साथ रिश्ता मजबूत होता है और दोनों के बीच में चल रही अनबन भी दूर हो सकती है। माना जाता है कि इस एक उपाय को करने से व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि आने लगती है।

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