Gauri Puja 2026:- गौरी पूजा महाराष्ट्र की महिलाओं के लिया एक विशेष उत्सव एवं महत्व रखता है। यह पूजा महाराष्ट्र में ‘मंगला गौरी’ के रूप में उल्लेखनीय भी है। यह उत्सव मुख्य रूप से महाराष्ट्र में मनाया जाता है। यह गणेश चतुर्थी के चौथे या पांचवें दिन के बीच आता है। यह हर वर्ष का मुख्य उत्सव होता है जिसको महिलाएं उत्साह के साथ मनाती हैं। हिंदुओं के अनुसार मंगला का अर्थ स्वर्गीय और होनहार है। पूरी रात महिलाओं के लिए हर्ष और उत्साह से भरी हुई है। इस उत्सव नव विवाहित महिलाओ के लिये विशेष महत्व रखता है, उनकी पहली मंगला गौरी पूजा जीवन में आवश्यक रूप से देखा गया है। प्रत्येक महिला इस दिन नई साड़ी और सभी पारंपरिक श्रंगार पहनती है। राजस्थान में इससे मिलता जुलता गणगौर उत्सव मनाया जाता है।
गौरी पूजन की रात को हर एक महिला मंगला गौरी की धुन गाती है। इन धुनों में एक प्रथागत आधार है जिसमे हिंदू विवाहित महिलाओं के जीवन का मार्ग दिखाया गया है। मंगला गौरी आयोजन में भाग लेने वाली जगराता करती है और विभिन्न प्रकार के उत्सव मानती है। इस आयोजन के बीच में जिम्मा और फुगड़ी के नाम से जाने जाने वाले मनोरंजन खेल खेले जाते हैं। जिम्मा में महिलाएं तालियां बजाती हैं और एक दूसरे को बधाई देती हैं। महिला मंडली गोल-गोल घूम के तालिया बजाती हुई नाचती और गाना गाती है।
Gauri Puja 2026:- गौरी पूजा का शुभ मुहूर्त
गणगौर पूजा शनिवार, मार्च 21, 2026 को
तृतीया तिथि प्रारम्भ – मार्च 21, 2026 को 02:30 ए एम बजे
तृतीया तिथि समाप्त – मार्च 21, 2026 को 11:56 पी एम बजे
Gauri Puja 2026:- गौरी पूजा कब मनाया जाता है?
गणगौर का त्योहार चैत्र महीने में पड़ता है, जो हिंदू पंचांग के अनुसार पहला महीना भी है । यह चैत्र महीने के पहले दिन से शुरू होता है, यानी होली के त्योहार के ठीक बाद और 18 दिनों तक चलता है। ग्रेगोरियन पंचांग के अनुसार, गौरी पूजा मार्च और अप्रैल के बीच पड़ती है। इसके अलावा, यह कड़ाके की सर्दी के मौसम के अंत और वसंत ऋतु की शुरुआत का भी प्रतीक है
Gauri Puja 2026:- गौरी पूजा उत्सव का महत्व
गणगौर या गौरी पूजा मुख्य रूप से देवी पार्वती की पूजा का त्योहार है, जिन्हें हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार वैवाहिक प्रेम, साहस, उत्कृष्टता, शक्ति और सामर्थ्य का प्रतीक माना जाता है। 18 दिनों तक चलने वाले इस उत्सव के दौरान, विवाहित महिलाएं अपने पतियों की दीर्घायु, धन और कल्याण के लिए देवी पार्वती से प्रार्थना करती हैं। ऐसा माना जाता है कि जो लड़कियां गणगौर पूजा करती हैं, उन्हें मनचाहा पति मिलता है
ऐसा माना जाता है कि गणगौर के दौरान देवी पार्वती अपने मायके लौटी थीं ताकि अपनी सहेलियों को वैवाहिक सुख का आशीर्वाद दे सकें। इसलिए, उत्सव के अंतिम दिन, देवी पार्वती और उन्हें विदा करने आए भगवान शिव को भव्य विदाई दी जाती है।
Gauri Puja 2026:- गणगौर पूजा विधि
- इस पूजा की शुरूआत भगवान गणेश की पूजा के साथ करनी चाहिए।
- इसके बाद देवी पार्वती की पूजा शुरू करे और देवी पार्वती की मूर्ति भगवान शिव के बाएं ओर स्थापित करे।
- अब माँ पार्वती का आवाहन करे और उसके बाद देवी का जल ओर पंचामृत से स्नान कराएं।
- देवी पार्वती को वस्त्र और आभूषण पहनाएं। फिर कुमकुम, चावल, दीपक, धूपबत्ती, पुष्प आदि चीजें माँ को अर्पित करें।
- इसके बाद देवी पार्वती की कथा पढे और उसके बाद आरती करे।
- माँ को प्रसाद के रूप में नारियल, मिठाई, पंचामृत, सूखे मेवे आदि का भोग लगाया जाता है।
Gauri Puja 2026:- गौरी पूजा के अचुक उपाय
- सुहाग सामग्री का दान करें
गणगौर के दिन सुहागिन महिलाओं को सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी, महावर, काजल, चुनरी आदि सुहाग सामग्री दान करना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और सौभाग्य बढ़ता है।
- गणगौर की प्रतिमा का विधिपूर्वक पूजन करें
इस दिन गणगौर माता (गौरी और ईश्वर) की प्रतिमा को घर में रखकर विधि-विधान से पूजा करें। मां गौरी को सुहाग की वस्तुएं अर्पित करें और सोलह श्रृंगार चढ़ाएं। ऐसा करने से वैवाहिक जीवन में प्रेम और विश्वास बढ़ता है।
- शिव-पार्वती को बेलपत्र और अक्षत चढ़ाएं
गणगौर पूजन में भगवान शिव और माता पार्वती को बेलपत्र और अक्षत (साबुत चावल) अर्पित करें। इससे दांपत्य जीवन में मधुरता आती है और पति-पत्नी के बीच प्रेम संबंध मजबूत होते हैं।
- सुहागिन स्त्रियों का आशीर्वाद लें
गणगौर के दिन विशेष रूप से विवाहित स्त्रियों को सुहाग की सामग्री भेंट कर उनका आशीर्वाद लें। ऐसा करने से अखंड सौभाग्य प्राप्त होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
- गणगौर माता को मीठा पान अर्पित करें
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन मां गौरी को मीठा पान अर्पित करने से वैवाहिक जीवन में आनंद बना रहता है। यह उपाय पति-पत्नी के बीच प्रेम और आपसी समझ को बढ़ाने में सहायक होता है।




