Bhai Dooj 2022: जानें किस दिशा की ओर मुख करके बहनें करें भाई का तिलक !!

bhai dooj 2022

Bhai Dooj 2022: भाई-बहन (bhai dooj) का रिश्ता नोकझोंक, लड़ाइयों, स्नेह और सुरक्षात्मक भावना का संबंध है। भाई बहन एक दूसरे से दिन भर झगड़ते रहते हैं, उनकी तकरार में दोनों का एक दूसरे के प्रति प्रेम और स्नेह झलकता है। एक दूसरे की चीजों पर हक जताने वाले भाई बहन एक दूसरे को दुनिया की हर खुशी देना चाहते हैं। बहन को अपने भाई के जीवन से जुड़ी हर खुशी की परवाह होती है। भाई के भविष्य को लेकर सबसे ज्यादा फिक्रमंद बहन रहती हैं। इसी तरह बहन की सुरक्षा, उसकी मुस्कान, उसकी हर जरूरत की चिंता भाई करते हैं। भाई-बहन के अटूट प्रेम का खास पर्व दिवाली के दो दिन बाद यानी भाई दूज (bhai dooj) के दिन मनाया जाता है। भाई दूज को बहन अपने भैया के मस्तक पर तिलक लगाकर उनका मुंह मीठा कराती हैं और उनकी लंबी उम्र के लिए पूजा करती हैं। वहीं भाई इस मौके पर बहन को तोहफे देकर उनके चेहरे पर मुस्कान लाते हैं। बहन छोटी हो या बड़ी, घर पर हो या फिर पढ़ाई के लिए किसी दूसरे शहर में, शादी से पहले हो या शादी के बाद, उसके हर कदम पर भाई हमेशा सुरक्षा के लिए चिंतित रहता है।

Bhai Dooj 2022: दोपहर के समय इसलिए होती है भाई दूज की पूजा

शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि यम द्वितीया यानी भाई दूज के दिन यमराज अपनी बहन के घर दोपहर के समय आए थे और बहन की पूजा स्वीकार करके उनके घर भोजन किया था। वरदान में यमराज ने यमुना से कहा था कि यम द्वितीया यानी भाई दूज (bhai dooj 2022) के दिन जो भाई बहनों के घर आकर बहनों की पूजा स्वीकार करेंगे और उनके हाथों से बना भोजन करेंगे तो उनको अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा। इसलिए यम द्वितीया भाई दूज में दोपहर के समय द्वितीया का अधिक महत्व है।

Bhai Dooj 2022: भाई दूज में इनकी करें पूजा

शास्त्रों में बताया गया है कि कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि, जिस दिन दोपहर के समय होती है, उसी दिन भाई दूज (bhai dooj) का त्योहार मनाना चाहिए। इसी दिन यमराज, यमदूत और चित्रगुप्त की पूजा करनी चाहिए और इनके नाम से अर्घ्य और दीपदान भी करना चाहिए। लेकिन अगर दोनों दिन दोपहर में द्वितीया तिथि हो तब पहले दिन ही द्वितीया तिथि में यम द्वितीया भाई दूज का पर्व मनाना चाहिए।

Bhai Dooj 2022: 26 अक्टूबर को मनाएं भाईदूज का त्योहार-

इस साल कार्तिक कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि 26 व 27 अक्टूबर दोनों दिन लग रही है। 26 अक्टूबर को दोपहर 02 बजकर 43 मिनट से भाईदूज का पर्व शुरू होगा, जो कि 27 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। इस दिन भाई को तिलक करने का शुभ मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 14 मिनट से 12 बजकर 47 मिनट तक रहेगा।

Bhai Dooj 2022: 27 अक्टूबर को पूजन का यह है शुभ मुहूर्त-

कई जगहों पर उदया तिथि के हिसाब से भाईदूज का पर्व 27 अक्टूबर को मनाया जाएगा। 27 अक्टूबर को भाईदूज का शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 07 मिनट से दोपहर 12 बजकर 46 मिनट तक रहेगा।

Bhai Dooj 2022: इन बातों का रखें ध्यान

भाई दूज पर भाई को तिलक लगाते समय दिशा का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, तिलक के समय भाई का मुंह उत्तर या उत्तर-पश्चिम दिशा में होना चाहिए. वहीं, बहन का मुख उत्तर पूर्व या पूर्व में होना शुभ होता है.

ध्यान रखें कि पूजा के लिए चौक उत्तर पूर्व में बनाना उचित रहता है. पूजा का चौक तैयार करने के लिए आटे और गोबर का इस्तेमाल करना चाहिए. इसके बाद भाई को चौक पर बैठाकर तिलक करना चाहिए. साथ में उसकी कलाई पर मौली बांध कर आरती उतारनी चाहिए. साथ में उसकी लंबी आयु की कामना करनी चाहिए.

Bhai Dooj 2022: भाई का तिलक करने की विधि

इस दिन यम अपनी बहन यमुना के घर भोजन करने गए थे। ऐसे में जो बहने शादी-शुदा हैं उनके भाईयों को अपनी बहन के घर जाना चाहिए। कुंवारी लड़कियां घर पर ही भाई का तिलक करें।

भाई दूज के दिन सबसे पहले भगवान गणेश का ध्यान करते हुए पूजा अवश्य करनी चाहिए। वहीं भाई का तिलक करने के लिए पहले थाली तैयार करें उसमें रोली, अक्षत और गोला रखें तत्पश्चात भाई का तिलक करें और गोला भाई को दे दें। फिर प्रेमपूर्वक भाई को मनपसंद का भोजन करवाएं। उसके बाद भाईयों को भी अपनी बहन से आशीर्वाद लेना चाहिए और उन्हें भेंट स्वरूप कुछ उपहार देना चाहिए।

भाई दूज क्यों मनाया जाता है

एक पौराणिक कथा के अनुसार यमुना तथा यमराज भाई और बहन थे। इनका जन्म भगवान श्री नारायण की पत्नी छाया की कोख से हुआ था। यमुना अपने भाई यमराज से बहुत स्नेह करती थीं और प्रेम के वशीभूत होकर यमराज को बार बार अपने घर भोजन करने के लिए आमंत्रित करती थीं, लेकिन यमराज अपनी दैनिक गतिविधियों में व्यस्त होने की वजह से उनका निमंत्रण अस्वीकार कर देते थे।

एक बार कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को यमुना ने अपने भाई यमराज को अपने घर में भोजन करने के लिए वचनबद्ध कर लिया। यमराज इस बात को सोचकर कि मैं जब लोगों का जीवन हरण करने वाला हूं तब भी बहन का स्नेह मुझे पुकार रही है। इस बात को सोचकर द्वितीया तिथि के दिन यमराज बहन यमुना के घर भोजन करने के लिए निकले और नरक के सभी जीवों को मुक्त किया।

यमराज के घर पर देख यमुना की खुशी का ठिकाना न रहा और वो उन्हें सम्मान पूर्वक भोजन कराने लगीं। बहन के स्नेह को देखकर यमराज ने बहन से वरदान मांगने को कहा। उस समय यमुना ने कहा कि मुझे वरदान स्वरुप यह चाहिए कि इस दिन जो बहन मेरी तरह अपने भाई का आदर, सत्कार और टीका करके भोजन कराएगी उसे कभी आपका भय न हो।

ऐसे में यमराज ने तथास्तु कहकर यमुना को अमूल्य वस्त्र और आभूषण दिए और वहां से चले गए। उसी समय से यह प्रचलन हुआ कि जो बहन अपने भाई को घर बुलाकर टीका करेगी और भोजन कराएगी उसके भाई पर यमराज की कृपा होगी और उसे दीर्घायु का वरदान मिलेगा।

यदि आप भी भाई दूज का पर्व मनाती हैं तो आप इस दिन अपने भाई को स्नेह पूर्वक घर बुलाकर टीका करें और भोजन कराएं। ऐसा करने से अवश्य ही भाई को दीर्घायु का वरदान मिलेगा।

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