Ram Navami 2024:- भगवान राम के जीवन से सीखें ये 5 बातें, जीवन के हर क्षेत्र में मिलेगी कामयाबी !!

ram navami 2024

Ram Navami 2024:- हिंदू धर्म को सर्वोच्च रखने वाली भारत की भूमि हमेशा से ही एक पवित्र भूमि रही है, इतिहास के पन्नों को पलट कर देखा जाएं तो यहाँ कई देवी देवताओं के मनुष्य अवतार का वर्णन मिलता है। इसी इतिहास की ओर लौटकर देखा जाएं तो, जब रावण के अत्याचार बहुत बढ़ गए और आमजन परेशान हो गए, तो इन अत्याचारों से मुक्ति दिलाने के लिए पुनः भारतीय भूमि पर एक महापुरुष ने जन्म लिया। इस महापुरुष का नाम भगवान राम था, जिन्होंने विद्धान पंड़ित रावण के अत्याचारों से मुक्ति दिलवाई और उस वक़्त लोगों का उद्धार किया। त्रेता युग में जन्में भगवान राम के जन्मदिवस को ही राम नवमी के रूप में मनाया जाता है।

Ram Navami 2024:- राम नवमी का शुभ महूर्त

पंचांग के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 17 अप्रैल, 2024

राम नवमी मुहूर्त:-11:3:16 से 13:38:19 तक

राम नवमी मध्याह्न मुहूर्त – 12:20:47

अवधि – 2 घन्टे 35 मिनट ।

Ram Navami 2024:- राम नवमी उत्सव कैसे मनाया जाता है?

ऐसा माना जाता है कि भगवान राम का जन्म मध्याह्न या दिन के दोपहर के घंटों के दौरान हुआ था और इसलिए रामनवमी पूजा करने के लिए यह सबसे शुभ समय है। मध्याह्न क्षण ठीक उसी समय को दर्शाता है जब श्री राम का जन्म हुआ था और मंदिरों में विशेष पूजा और यज्ञ किए जाते थे। इस समय श्री राम के नाम और मंत्रों और भजनों का जाप किया जाता है।

अयोध्या में रामनवमी का उत्सव उल्लेखनीय है। इस दिन, अयोध्या रोशनी से सजी रहती है और भक्त मंदिर में आते हैं। अयोध्या में दूर-दूर से लोग आते हैं। वे आमतौर पर राम मंदिर जाने से पहले सरयू नदी में पवित्र स्नान करते हैं।

Ram Navami 2024:- राम नवमी का महत्व क्या है?

सनातन धर्म में पूरे वर्ष कोई ना कोई  त्योहार मनाया जाता है। जिनका अपना एक अलग महत्व होता है, उसी तरह से राम नवमी का यह त्योहार धरती पर से बुरी शक्तियों के पतन और यहाँ साधारण मनुष्यों को अत्याचारों से मुक्ति दिलवाने के लिए भगवान के स्वयं आगमन का प्रतीक मानी जाती है। इस दिन धरती पर से असुरों के अत्याचारों को समाप्त करने के लिए भगवान विष्णु ने स्वयं धरती पर श्रीराम के रुप में अवतार लिया था। राम नवमी सभी हिंदुओं को मानने वालों के लिए एक खास पर्व है, जिसे वह पूरे उल्लास के साथ मनाते है। इस दिन जन्में श्री राम ने धरती पर से रावण के अत्याचार को समाप्त कर यहाँ राम राज्य की स्थापना की थी और दैवीय शक्ति के महत्व को समझाया था।

इस दिन ही नवरात्रि का आखरी दिन होता है, इसलिए दो प्रमुख हिन्दू त्योहारों का एक साथ होना, इस त्योहार के महत्वता को और अधिक बढ़ा देता है।

Ram Navami 2024:- राम नवमी के दिन क्या करें?

राम नवमी एक बहुत ही पवित्र दिन है। इस दिन आप उपवास भी रख सकतें हैं।

प्रातः काल उठ कर स्नान आदि करने के पश्चात सूर्य देव को अर्घ अवश्य दें।

इस दिन अयोध्या के पवित्र सरयू नदी में स्नान करने का भी बहुत अधिक धार्मिक महत्व है।

आप इस दिन राम चरित मानस का पाठ कर सकतें हैं। इसके अलावा आप श्री राम चालीसा, श्री राम रक्षा स्तोत्र आदि का पाठ करें।

सम्पूर्ण भक्ति भाव के साथ श्री राम जी की पूजा अर्चना करें।

इस दिन जुलुस आदि भी निकालें जातें हैं।

बजरंगबली की ध्वजा की भी इस दिन पूजा होती है।

आप भी बजरंगबली हनुमान की ध्वजा की पूजा करने के पश्चात अपने घर पर लगा सकतें हैं।

इस दिन दान पुण्य करने का भी बहुत अधिक धार्मिक महत्व है। आप इस दिन हनुमान चालीसा का भी पाठ अवश्य करें।

राम जी के जन्म दिवस पर राम जी का भजन भये प्रकट कृपाला को भी अवस्य गातें हुए श्री राम जी की स्तुति करें।

Ram Navami 2024:- राम नवमी से सीखें ये 5 बातें

  • चरित्र और आचरण

रामायण में भगवान श्रीराम को भगवान विष्णु का अवतार बताया गया है जो स्वंय भगवान के गुणों से ओतप्रोत है। आज समाज के लोगों के आचरण में जो मिलावट आई है ऐसे में भगवान राम के आचरण से हमें पवित्रता की सीख लेनी चाहिए।

  • मातापिता के लिए सम्मान

पिता दशरथ और माता कैकेयी के द्वारा 14 वर्ष का वनवास दिए जाने पर श्री राम ने माता-पिता की आज्ञा का पालन किया। साथ ही भगवान राम को पता था कि मेरे पिता वचन के आगे मजबूर हैं इसलिए उन्हें उनकी आज्ञा का पालन करना ही होगा इसलिए राम ने वनवास का रास्ता चुन लिया।

  • गुरु के प्रति आदर

गुरु का स्थान किसी भी व्यक्ति के जीवन में सबसे बड़ा होता है। गुरू के ज्ञान से ही हम जीवन में सफलता प्राप्त कर पाते हैं परन्तु आज का युवा गुरू की आज्ञा का पालन नही करता है और बिना मार्गदर्शन के गलत राह पर चलने लगता है। भगवान श्री राम जी ने हमेशा अपने गुरु वशिष्ट की आज्ञा का पालन किया है। हमें उनके चरित्र से गुरू भक्ति सीखनी चाहिए।

  • धैर्यशाली व्यक्तित्व

किसी भी मुश्किल परिस्थिति में भगवान राम ने अपना धैर्य नहीं खोया है। उन्होनें हर परेशानी में धैर्य से काम लिया है इसलिए हमें भगवान राम जी तरह जीवन की हर तकलीफ मेंं शांति से कार्य करना चाहिए।

  • जो किस्मत में लिखा है उसको अपनाना

भगवान श्री राम जी ने कभी भी नियति को बदलने की कोशिश नही की,जो नियति में लिखा हुआ है हमें वह स्वीकार करना चाहिए क्योंकि नियति से कोई भी नही लड़ सकता है।

Ram Navami 2024:- राम नवमी इतिहास क्या है ?

राम नवमी भारत में मनाए जाने वाले सबसे पुराने त्योहारों में से एक है। ऐसा कहा जाता है कि रामनवमी की तारीख को पूर्व-ईसाई युग में देखा जा सकता है, क्योंकि हिंदू धर्म दुनिया का सबसे पुराना धर्म है। रामनवमी का उल्लेख कालिका पुराण में भी मिलता है। यह पहले के समय में कहा जाता है जब भारत में जाति व्यवस्था आम थी; राम नवमी उन कुछ त्योहारों में से एक था जिन्हें मनाने के लिए निचली जातियों को दी गई थी। हिंदू धर्म में, इसे पांच प्रमुख पवित्र त्योहारों में से एक माना जाता है और कहा जाता है कि इस व्रत को ठीक से करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

हर साल, मार्च-अप्रैल के महीने में भारत भर के मंदिरों और धार्मिक स्थलों में गतिविधियों की झड़ी लग जाती है, जिसमें लाखों हिंदुओं के दिल में आस्था और मन में समर्पण होता है। यह जानने वाले के लिए कोई असामान्य बात नहीं है, जो पूरी तरह से जानता है कि चैत्र का हिंदू महीना निकट है और राम नवमी, पवित्र हिंदू अवसरों में से एक, ‘शुक्ल पक्ष’ या शुक्ल पक्ष में नौवें दिन मनाया जाना है।

समर्पित हिंदुओं का मानना ​​है कि इसी दिन वर्ष 5114 ईसा पूर्व में अयोध्या के राजा दशरथ (भारत में उत्तर प्रदेश राज्य का एक प्राचीन शहर) की प्रार्थनाओं का उत्तर दिया गया था। इस राजा की कौशल्या, सुमित्रा और कैकेयी नाम की तीन पत्नियाँ थीं। लेकिन तीनों में से किसी ने भी उसे एक नर संतान नहीं दी, जिसे राजा को अपने साम्राज्य की देखभाल करने और अपने सिंहासन के उत्तराधिकारी के रूप में चाहिए। शादी के कई साल बाद भी राजा पिता नहीं बन पाए।

तब महान ऋषि वशिष्ठ ने उन्हें संतान प्राप्त करने के लिए किए जाने वाले पवित्र अनुष्ठान पुथरा कामेस्टी यज्ञ करने की सलाह दी। राजा दशरथ की सहमति से, महान ऋषि महर्षि रुष्य श्रुंग ने सबसे विस्तृत तरीके से अनुष्ठान किया। राजा को पायसम (दूध और चावल की तैयारी) का एक कटोरा दिया गया और उसे अपनी पत्नियों के बीच भोजन वितरित करने के लिए कहा गया। राजा ने आधा पायसम अपनी बड़ी पत्नी कौशल्या को और आधा अपनी छोटी पत्नी कैकेयी को दे दिया। दोनों पत्नियां अपना आधा हिस्सा सुमित्रा को देती हैं। पवित्र भोजन के इस असमान वितरण से कौशल्या और कैकेयी दोनों ने एक-एक पुत्र को जन्म दिया, जबकि सुमित्रा के जुड़वां पुत्रों का जन्म हुआ।

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