Kumbha Sankranti 2026:- कब कर रहे हैं भगवान सूर्य धनु राशि में प्रवेश, जाने धनु संक्रांति का पूजन मुहूर्त, विधि, महत्व और अचूक उपाय!!

kumbha Sankranti 2026

Kumbha Sankranti 2026:- कुंभ संक्रांति

कुंभ संक्रांति वह दिन है जब सूर्य मकर राशि से कुंभ राशि में प्रवेश करता है। हिंदू सौर कैलेंडर के अनुसार, यह ग्यारहवें महीने की शुरुआत है। इस दिन का शुभ समय सीमित होता है और सूर्य की स्थिति के कारण हर साल बदलता रहता है। इसी दिन दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक उत्सव कुंभ मेला एक ही स्थान पर आयोजित होता है। लाखों लोग अपने और अपने आसपास के सभी पापों और बुराइयों को दूर करने के लिए गंगा नदी में पवित्र स्नान के लिए आते हैं।

देश भर में कई हिंदू कुंभ संक्रांति मनाते हैं, लेकिन पूर्वी भारत के लोग इसे बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए यह फाल्गुन मास की शुरुआत है और मलयालम कैलेंडर के अनुसार, इसे मासी मासम के नाम से जाना जाता है। भक्त प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक जैसे पवित्र शहरों में गंगा स्नान करने और भविष्य में सुख और सौभाग्य की कामना करने के लिए जाते हैं। इन शहरों के तट पर स्थित मंदिर इस दिन भक्तों से भरे रहते हैं।

Kumbha Sankranti 2026:- कुंभ संक्रांति 2026 का शुभ मुहूर्त

कुम्भ संक्रान्ति मंगलवार, जनवरी 20, 2026 को

कुम्भ संक्रान्ति पुण्य काल – 07:14 ए एम से 12:32 पी एम

अवधि – 05 घण्टे 18 मिनट्स

कुम्भ संक्रान्ति महा पुण्य काल – 07:14 ए एम से 09:00 ए एम

अवधि – 01 घण्टा 46 मिनट्स

Kumbha Sankranti 2026:- कुंभ संक्रांति पूजा विधि

  • इस दिन भक्त सुबह जल्दी उठें और पवित्र नदियों में स्नान करने जाएं।
  • जो लोग गंगा नदी में स्नान करने में असमर्थ हैं, वे घर पर ही स्नान के जल में गंगाजल डालकर स्नान कर सकते हैं।
  • भगवान सूर्य को अर्घ्य दें और उनके मंत्रों का जाप करें।
  • इस दिन धार्मिक कार्य जैसे – मंत्र जाप, पवित्र पुस्तकों व ग्रंथों का पाठ और यज्ञ करें।
  • इस दिन दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है, इसलिए इस प्रकार के कार्यों में अवश्य शामिल हों।
  • इस दिन तामसिक चीजों से परहेज करें।
  • इस तिथि पर सात्विकता का पालन करें।
  • इस दिन अपने पितरों और बड़ों का आशीर्वाद लें।

Kumbha Sankranti 2026:- कुंभ राशि में सूर्य गोचर का ज्योतिष महत्व

सूर्य आत्मा, नेतृत्व, शक्ति और आत्मविश्वास का कारक यानी स्वामी और नियंत्रक ग्रह हैं, वहीं शनि अनुशासन, कर्म, न्याय और मेहनत के कारक ग्रह हैं। ज्योतिष ग्रंथों के अनुसार, सूर्य और शनि का आपस में पिता-पुत्र का संबंध है। यह गोचर जातकों के जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित कर सकता है, जैसे कि करियर, व्यापार, आर्थिक स्थिति रिश्ते और स्वास्थ्य। कुछ राशियों के जातकों को इस दौरान करियर में सफलता मिल सकती है। उन्हें नए अवसर मिल सकते हैं और उनके कार्यक्षेत्र में उन्नति हो सकती है। वे अपने लक्ष्यों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकते हैं और तनाव से दूर रह सकते हैं। यह गोचर कुछ जातकों के रिश्तों के लिए भी अच्छा माना जाता है।

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