Apara Ekadashi 2026:- जाने अपरा एकादशी 2026 कब है? क्या है शुभ मुहूर्त, पूजन विधि, व्रत कथा, महत्व और अचुक उपाय!!

Apara Ekadashi 2026

Apara Ekadashi 2026:- अपरा एकादशी ज्येष्ठ माह में एक वाली पहली एकादशी होती है जो कृष्ण पक्ष के समय पर आती है।हिंदू धर्म में वर्ष 24 को एकादशी आती है, जिसमें हर एक का अपना विशेष महत्व होता है। उन सभी में से एक है अपरा एकादशी, जिसे ‘अचला एकादशी’ भी कहा जाता है। यह ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष में आता है और इसका विशेष संबंध आत्मिक शुद्धि, पापों से मुक्ति और मोक्ष प्राप्ति से है। यह व्रत न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि ज्योतिष, आध्यात्मिक अभ्यास और मानसिक संतुलन की दृष्टि से भी अत्यधिक माना जाता है। आओ इस ब्रह्माण्ड को गहराई से समझें।

Apara Ekadashi 2026:- अपरा द्वितीय अर्थ

अपरा विशाल अपार धन वैभव और सुख प्रदान करने वाली है। इस दिन एकादशी व्रत करने से भक्त को सभी प्रकार के शुभ प्रकार के पुण्य फल मिलते हैं। यह पुराने लोगों के लिए भी वैभवशाली रूप धारण करता है, जो जीवन में गलतियाँ कर चुके हैं और व्यावसायिक भावनाएँ धारण किए हुए हैं। शास्त्रों में वर्णित है कि अपरा एकादशी का व्रत करने से ऐसा पुण्य मिलता है जो गंगा-स्नान, हजारों गोदान और यज्ञों को करने से मिलता है।

Apara Ekadashi 2026:- अपरा एकादशी तिथि, मुहूर्त व पारण समय

एकादशी तिथि प्रारंभ       11 मई 2026, सुबह 11:28 बजे

एकादशी तिथि समाप्त     12 मई 2026, सुबह 09:45 बजे

पारण का समय   13 मई 2026, सुबह 06:18 बजे से 08:32 बजे तक

द्वादशी तिथि समाप्त         13 मई 2026, शाम 07:05 बजे

Apara Ekadashi 2026:- अपरा एकादशी पूजा विधि

अपरा एकादशी पूजा विधि को विधि-विधान से करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। नीचे दी गई पूजा विधि का पालन करें:

  • प्रातः स्नान: सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • मंदिर की सफाई: घर के मंदिर को साफ करें और पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
  • भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापना: भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र को पीले कपड़े पर स्थापित करें।
  • अर्पण: भगवान को तुलसी पत्र, पीले फूल, चंदन, केसर, फल, और मिठाई अर्पित करें।
  • दीप-धूप: देसी घी का दीपक जलाएं और धूप दिखाएं।
  • मंत्र जाप: विष्णु गायत्री मंत्र “ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।” का 108 बार जाप करें।
  • व्रत कथा: अपरा एकादशी की कथा पढ़ें या सुनें।
  • आरती: विष्णु जी और माता लक्ष्मी की आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
  • दान-पुण्य: गरीबों और जरूरतमंदों को दान करें, विशेष रूप से पीले वस्त्र या अन्न।

Apara Ekadashi 2026:- अपरा एकादशी की सम्पूर्ण कथा

द्वापर युग में एक बार राजा युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा:

हे प्रभु! कृपया मुझे ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी का महत्व और उसकी कथा सुनाएँ। कौन-सा व्रत मनुष्य के महापापों का नाश कर उसे परम यश और मोक्ष प्रदान करता है?

भगवान श्रीकृष्ण मुस्कुराए और बोले:

हे धर्मराज! यह एकादशी अपरा एकादशी कहलाती है। यह पापों को नष्ट करने वाली और मोक्ष देने वाली है। इसकी कथा अद्भुत और प्रेरणादायी है।

भगवान ने बताया कि प्राचीन समय में महिष्मति नगरी में सुमतिशर्मा नामक एक ब्राह्मण रहता था। वह अत्यंत विद्वान था, लेकिन दुर्भाग्यवश वह पापों और मोह में फँसकर अधर्म के मार्ग पर चला गया। वह चोरी करता, झूठ बोलता और गलत तरीके से धन अर्जित करता था। समय के साथ उसके भीतर की बुद्धि और विवेक नष्ट हो गए।

एक दिन शहर के लोगों ने उसे पापकर्म करते पकड़ा और राजा के सामने प्रस्तुत किया। राजा ने उसे देश से बाहर निकाल दिया। सुमतिशर्मा दुखी होकर जंगल में भटकने लगा। भूख-प्यास से तड़पता हुआ वह एक दिन एक ऋषि के आश्रम पहुँचा। उसकी हालत देखकर ऋषि ने उसे शांति दी और पूछा कि वह किस कष्ट से घिरा है।

सुमतिशर्मा रोते हुए बोला

गुरुदेव! मैंने जीवन में अनेक पाप किए हैं। क्या मेरे लिए कोई मुक्ति का मार्ग है

ऋषि ने करुणा से कहा

हे ब्राह्मण! यदि तू सच्चे मन से Apara Ekadashi Vrat करेगा तो तेरे सभी पाप नष्ट हो जाएंगे। यह व्रत सबसे बड़े पापी को भी पवित्र बना देता है। इसका फल अनगिनत यज्ञों के बराबर है।

अगले दिन जब अपरा एकादशी आई, सुमतिशर्मा ने पूरे नियम से व्रत किया। उसने उपवास रखा, सत्य का पालन किया, दान किया और भगवान विष्णु का नाम जपा। व्रत पूरा होते ही उसके हृदय में प्रकाश फूटा, उसकी बुद्धि शुद्ध हुई और मन पवित्र हो गया। धीरे-धीरे उसके पापकर्म समाप्त हो गए और वह पुनः पुण्यात्मा बन गया।

भगवान श्रीकृष्ण बोले

हे युधिष्ठिर! उसी दिन से यह व्रत अपर पापों का नाश करने वाला कहलाने लगा। जो इस व्रत को करता है, उसके जीवन से सभी पाप मिट जाते हैं और वह परम सुख, यश और मोक्ष प्राप्त करता है।

Apara Ekadashi 2026:- अपरा एकादशी का महत्व

सबसे पहले, अपरा एकादशी अपार पुण्य और सुख प्रदान करती है। विशेष रूप से, निर्जल व्रत से सभी मनोरथ सिद्ध होते हैं। इसके अतिरिक्त, यह व्रत ब्रह्म हत्या और प्रेत योनि जैसे पापों से मुक्ति देता है। इसके लिए, भगवान विष्णु की पूजा तुलसी, चंदन और गंगाजल से करनी चाहिए। फलस्वरूप, साधक को शांति और समृद्धि प्राप्त होती है।

Apara Ekadashi 2026:- एकादशी पर दान का महत्व

मुख्य रूप से, अपरा एकादशी सनातन धर्म में पुण्यकारी दिन है। इसलिए, इस दिन स्नान और दान से विशेष पुण्य मिलता है। उदाहरण के लिए, ब्राह्मणों और निर्धन लोगों को भोजन, वस्त्र और अन्न दान करना उत्तम है। परिणामस्वरूप, भगवान विष्णु की कृपा मिलती है। इसके अतिरिक्त, दान से साधक के कष्ट दूर होते हैं।

शास्त्रों के अनुसार, एक हाथ से दिया दान हजार गुना लौटता है। हालांकि, धन और यश यहीं रह जाते हैं। फिर भी, दान का पुण्य मृत्यु के बाद भी साथ रहता है। उदाहरण के तौर पर, गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में कहा:

तुलसी पंछी के पिये घटे न सरिता नीर।

दान दिये धन ना घटे जो सहाय रघुवीर।।

इसका अर्थ है, पक्षियों के पानी पीने से नदी का जल नहीं घटता। इसी तरह, भगवान के आशीर्वाद से दान देने से धन कभी कम नहीं होता।

Apara Ekadashi 2026:- अपरा एकादशी 2026 के अचुक उपाय

भोग में शामिल करें तुलसी

अपरा एकादशी के दिन पूजा में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी को फल और मिठाई समेत आदि चीजों का भोग लगाएं. भोग में तुलसी के पत्ते जरूर शामिल करें. ऐसा मान्यता है कि भोग में तुलसी के पत्ते शामिल न करने से प्रभु भोग को स्वीकार नहीं करते हैं.

घी का दीया जलाएं

अपरा एकादशी के दिन शाम के समय तुलसी के पौधे घी का दीपक जलाना चाहिए. मान्यता है कि ऐसा करने से घर-परिवार पर भगवान विष्णु की कृपा होती है. इसके अलावा अपरा एकादशी के दिनत भगवान विष्णु का ध्यान करके तुलसी के पौधे की 7 बार परिक्रमा करें. कहते है कि इससे आपका स्वास्थ्य उत्तम रहेगा.

इन मंत्रों का करें जाप

महाप्रसाद जननी सर्व सौभाग्यवर्धिनी, आधि व्याधि हरा नित्यं तुलसी त्वं नमोस्तुते।।

मां तुलसी का पूजन मंत्र

तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी। धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमन: प्रिया।।

लभते सुतरां भक्तिमन्ते विष्णुपदं लभेत्। तुलसी भूर्महालक्ष्मी: पद्मिनी श्रीर्हरप्रिया।।

तुलसी माता का ध्यान मंत्र

तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी। धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमन: प्रिया।।

लभते सुतरां भक्तिमन्ते विष्णुपदं लभेत्। तुलसी भूर्महालक्ष्मी: पद्मिनी श्रीर्हरप्रिया।।

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