Ram Navmi 2026:- रामनवमी 2026 कब है, जानें शुभ मुहूर्त, पूजन विधि, व्रत कथा महत्व और अचुक उपाय!!

Ram navmi 2026

राम नवमी को मर्यादा पुरुषोत्तम, भगवान विष्णु के सातवें अवतार भगवान राम के जन्म के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष, 2026 में, राम नवमी 27 मार्च को मनाई जाएगी। यह शुभ दिन न केवल भगवान राम के जन्म का उत्सव है, बल्कि धर्म, सत्य, मानवता और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक भी है।

Ram Navmi 2026:- भगवान राम का जन्म

हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, राम नवमी की कथा वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण से उत्पन्न हुई है। कहा जाता है कि अयोध्या के एक धर्मात्मा शासक, राजा दशरथ और रानी कौशल्या, कई वर्षों से निःसंतान थे। संतान प्राप्ति की इच्छा से उन्होंने निःसंतान दंपतियों को आशीर्वाद देने के लिए पवित्र पुत्रकामेष्टि यज्ञ किया।

यज्ञ के परिणामस्वरूप रानी कौशल्या ने राम, कैकेयी ने भरत और सुमित्रा ने लक्ष्मण और शत्रुघ्न को जन्म दिया।

भगवान राम का जन्म चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नौवीं तिथि (नवमी) को दोपहर के समय हुआ था। उनका जन्म दिव्य था—वे भगवान विष्णु के अवतार थे, जिन्हें पृथ्वी पर अच्छाई और न्याय को पुनर्स्थापित करने के लिए भेजा गया था

उनकी जीवन गाथा रामायण में वर्णित है, जहाँ वे रावण से युद्ध करके अपनी पत्नी सीता की रक्षा करते हैं। यह महाकाव्य युद्ध बुराई पर अच्छाई की अंतिम विजय का प्रतीक है।

Ram Navmi 2026:- रामनवमी 2026 मुहूर्त

राम नवमी बृहस्पतिवार, मार्च 26, 2026 को

राम नवमी मध्याह्न मुहूर्त – 11:13 ए एम से 01:41 पी एम

राम नवमी मध्याह्न का क्षण – 12:27 पी एम

नवमी तिथि प्रारम्भ – मार्च 26, 2026 को 11:48 ए एम बजे

नवमी तिथि समाप्त – मार्च 27, 2026 को 10:06 ए एम बजे

Ram Navmi 2026:- रामनवमी पूजा विधि

राम नवमी की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नहाना बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन स्नान के बाद सबसे पहले तांबे के लोटे में जल भरकर उसमें लाल फूल और थोड़ा चावल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। इसके बाद घर में साफ-सुथरी जगह पर भगवान राम की तस्वीर या मूर्ति रखें और उसकी पूजा करें। भगवान राम की पूजा में पीले रंग का काफी महत्व होता है। इस दिन आप भगवान को पीले फूल, पीला वस्त्र और चंदन अर्पित करें। इसके साथ ही इस दिन श्रीरामचरितमानस का पाठ करें या सुंदरकांड पढ़ें। पूजा करते समय ‘ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं रामचन्द्राय श्री नमः’ मंत्र का 108 बार जप करें। ऐसा करना बहुत फलदायी माना जाता है। साथ ही घर की छत पर रामध्वज यानी ध्वजा लगाना भी शुभ माना जाता है।

Ram Navmi 2026:- राम नवमी व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार अयोध्या के महाराज दशरथ को पुत्र रत्न की प्राप्ति नहीं हो रही थी। ऐसे में महाराज दशरथ ने अपने गुरु महर्षि वशिष्ठ के निर्देशों का पालन करते हुए एक महायज्ञ आयोजित किया।

महाराज दशरथ ने इस यज्ञ में सभी यशस्वी ऋषि-मुनियों को आमंत्रित किया। जिस दिन यज्ञ का शुभारंभ होना था उस दिन गुरु वशिष्ठ के साथ महाराज दशरथ के मित्र अंग प्रदेश के अधिपति ऋंग ऋषि और अन्य आगंतुक भी यज्ञ मंडप पर आये।

यज्ञ के समापन के बाद महाराज दशरथ ने सभी ऋषि और पंडितों को दक्षिणा स्वरुप धन-धान्य का दान कर विदा किया। यज्ञ से प्राप्त प्रसाद लेकर राजा दशरथ पुनः अपने महल में लौट आए और प्रसाद अपनी तीनों रानियों के बीच वितरित किया। तत्पश्चात यज्ञ के पुण्य फल से तीनों रानियों ने गर्भ धारण किया।

सबसे पहले माता कौशल्या ने एक पुत्र को जन्म दिया। रानी कौशल्या के द्वारा जन्में उस बालक के चेहरे पर करोड़ों सूर्य के समान आभा थी और उस बालक व्यक्तित्व अत्यंत ही आकर्षण था। अनुपम छवि वाले उस बालक को जो कोई भी देखता, मंत्रमुग्ध हो जाता। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को जन्मा यह बालक और कोई नहीं बल्कि सृष्टि के महानायक श्री विष्णु के सप्तम अवतार भगवान राम का ही बालरूप था।

माता कौशल्या के बाद अन्य दो रानियों, अर्थात माता कैकयी और माता सुमित्रा ने भी शुभ नक्षत्रों में पुत्रों को जन्म दिया। माता कैकयी के एक पुत्र अर्थात भरत हुए एवं माता सुमित्रा के दो पुत्र लक्ष्मण एवं शत्रुघ्न हुए।

अयोध्या के नन्हें राजकुमारों के जन्म का समाचार पाते ही पूरी अयोध्या नगरी में खुशियों और उत्साह की लहर दौड़ गई। गीत-संगीत जैसे समारोहों से राजा दशरथ के चारों पुत्रों का स्वागत करते हुए उनका जन्मदिवस मनाया गया। वहीं देवताओं ने भी इस उत्सव में भाग लेते हुए इन नन्हें राजकुमारों को नमन किया और आकाश से अनगिनत पुष्पों की वर्षा कर उनका स्वागत करते हुए अपनी प्रसन्नता जताई। शीघ्र ही चारों पुत्रों का नामकरण संस्कार महर्षि वशिष्ठ के द्वारा किया गया तथा उनके नाम रामचन्द्र, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न रखे गए।

अत्यन्त विलक्षण प्रतिभा के धनी श्री राम अल्प काल में ही अयोध्यावासियों के प्रिय हो गये। उन्हें सभी प्रकार के अस्त्र-शस्त्र चलाने में असाधारण निपुणता प्राप्त हो गई। वे निरन्तर माता-पिता और गुरुजनों की सेवा में लगे रहते थे।

श्री विष्णु के सातवें महा अवतार के रूप में जन्में श्री राम ने अपने जीवन काल में अनेकों महान और धर्म परायण कार्य किये। चाहे सीता स्वयंवर में धनुष तोड़ना हो या महाबली बाली का वध कर सुग्रीव की सहायता करना हो।

विवाह के पश्चात् मर्यादापुर्षोत्तम श्रीराम अपने पिता की आज्ञा का पालन करते हुए पत्नी सीता और अनुज लक्ष्मण समेत वनवास स्वीकार किया जहाँ माता सीता की दुराचारी रावण से रक्षा करते हुए प्रभु ने अत्याचारी रावण का संहार किया। ये वही राम हैं जो स्वयं जगत के पालनहार हैं और दुर्लभ शक्तियों के स्वामी है किन्तु उन्होनें एक सामान्य मनुष्य जीवन का एक अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया।

युगों युगों के बाद आज भी श्री रामचंद्र के आदर्श व्यक्तित्व, धैर्य, निष्ठा, त्याग एवं पराक्रम को श्रद्धा और सम्मान देते हुए राम नवमी के दिन उनका जन्मोत्सव मनाया जाता है। आज भी राम भक्त अनन्य आस्था के साथ अपने आराध्य श्री राम का अवतरण दिवस मनाते हैं।

Ram Navmi 2026:- राम नवमी का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्त्व

यह दिन अयोध्या में राजा दशरथ के घर भगवान विष्णु के सातवें अवतार श्रीराम के जन्म की खुशी में मनाया जाता है। श्रीराम को “मर्यादा पुरुषोत्तम” कहा जाता है। इस दिन सत्य, प्रेम, त्याग और सेवा की भावना को अपनाने का संकल्प लेना अत्यंत शुभ माना

Ram Navmi 2026:-  रामनवमी के अचूक उपाय

शत्रु नाश के लिए 11 बार करें राम रक्षा स्तोत्र का पाठ

राम नवमी के दिन राम रक्षा स्तोत्र का 11 बार पाठ करने से परेशानियां खत्म होती हैं। शत्रुओं का नाश होता है। राह की रुकावटें दूर होती हैं और कार्यसिद्धि प्राप्त होती है। कहा जाता है कि राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करने वाले व्यक्ति के चारों ओर एक सुरक्षा कवच बन जाता है। भगवान स्वयं उसकी रक्षा करते हैं। मान्यता है कि राम रक्षा स्तोत्र की रचना ऋषि कौशिक ने की थी। इसके पाठ से नवग्रहों के कुप्रभावों से भी रक्षा होती है।

​बालकांड का करें पाठ, महापीड़ा से मिलेगी मुक्ति

राम नवमी के पावन अवसर पर रामचरित मानस के बालकांड का पाठ करने का खास महत्व है। बालकांड में श्रीराम के बाल चरित्र का विस्तार से वर्णन किया गया है। इसमें प्रभु के जन्म से लेकर विवाह तक की घटनाओं के बारे में बताया गाय है। समझा जाता है कि बालकांड का पाठ करने से महापीड़ा और ग्रहपीड़ा से मुक्ति मिलती है।

​विष्णु सहस्रनाम के पाठ से दूर होंगे ग्रह दोष

राम नवमी पर रात्रि जागरण करें और रात भर जितनी बार हो सके, उतना विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। भगवान राम विष्णु जी के ही अवतार हैं और भगवान विष्णु जगत के पालक हैं। ऐसे में उनकी आराधना का अपना महत्व है। विष्णु सहस्त्रनाम में भगवान विष्णु के 1000 नाम हैं। इनके द्वारा उनका पूजन किया जाता है। मान्यता है कि विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से सभी पाप और भय दूर होते हैं। कुंडली में व्याप्त ग्रह दोष शांत होते हैं। घर में सौभाग्य और खुशियां आती हैं।

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